महायुति के विधायक मौन—किसके संरक्षण में अवैध निर्माण? सत्ता की चुप्पी पर सवाल
क्या वसई-विरार में खत्म हो गया प्रशासन का डर?
सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
वसई-विरार। गुंडाराज खत्म करने के दावे के साथ सत्ता में आई भाजपा के राज में क्या सरकारी अधिकारी ही असहाय हो गए हैं? क्या वसई-विरार में कानून का राज है या भीड़तंत्र का? पेल्हार पुलिस स्टेशन अंतर्गत नालासोपारा पूर्व के जाबरपाड़ा में 9 फरवरी 2026 को जो हुआ, उसने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रभाग समिति ‘एफ’ के अंतर्गत आने वाले जाबरपाड़ा क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने पहुँची वसई विरार शहर महानगर पालिका की टीम को विरोध और हंगामे के बीच बिना कार्रवाई किए लौटना पड़ा। प्रभारी सहायक आयुक्त अश्विनी मोरे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँची थीं, लेकिन हालात ऐसे बने कि जेसीबी तक स्थल तक नहीं पहुँच सकी। आरोप है कि चारपहिया वाहन रास्ते में खड़े कर दिए गए थे। घटना के बाद मोरे ने पेल्हार पुलिस स्टेशन में 13 नामजद और 25-30 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। वाहनों के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ है।
बड़ा सवाल:
क्या अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करना अपराध है?
यदि नहीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी? क्या भीड़ के दबाव में प्रशासन झुक गया? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मनपा के कुछ अधिकारी ईमानदारी से काम करना चाहते हैं, लेकिन कुछ भ्रष्ट तत्व अवैध निर्माणों को संरक्षण देते हैं। ऐसे में जब कार्रवाई की कोशिश होती है तो माहौल गरमा जाता है।
विधायक कहाँ हैं?
यह मामला केवल अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था का भी है। क्षेत्र के विधायक — भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) — अब तक खामोश क्यों हैं? क्या उन्होंने घटना की निंदा की?
क्या अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया? अगर सरकारी अधिकारियों को ही खुलेआम रोका जाएगा, तो आगे चलकर हर अवैध निर्माणकर्ता भीड़ इकट्ठा कर प्रशासन को चुनौती देगा। क्या यही “कानून का राज” है?
ढोलक बने अधिकारी?
शहर में चर्चा है कि मनपा अधिकारी “ढोलक” बन गए हैं—पक्ष और विपक्ष दोनों उन्हें अपने-अपने तरीके से बजा रहे हैं। कहीं राजनीतिक दबाव, कहीं अंदरूनी मिलीभगत—और बीच में पिसता है कानून।
आगे क्या?
अब निगाहें प्रशासन और पुलिस पर टिकी हैं।
क्या एफआईआर के बाद ठोस कार्रवाई होगी?
क्या अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलेगा?
या फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
वसई-विरार की जनता जवाब चाहती है। क्योंकि सवाल सिर्फ जाबरपाड़ा का नहीं, पूरे शहर की कानून व्यवस्था का है।

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