मैं राज ठाकरे को फोन करने के लिए तैयार
उद्धव ठाकरे का अचानक हृदय परिवर्तन क्यों, फिर एक हो जाएंगे दोनों भाई?
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में फिर बड़ी हलचल होती हुई नजर आ रही है। इसके पीछे की वजह है उद्धव ठाकरे का वह बयान जिसमें उन्होंने कहा कि वे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे को फोन करने के लिए तैयार हैं। दरअसल उद्धव ठाकरे ने कहा कि दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की स्मारक के सन्दर्भ में वह राज ठाकरे को फोन करने को तैयार हैं। उद्धव ठाकरे ने कहा कि मौका आने पर वे राज ठाकरे से बातचीत करेंगे। बीएमसी समेत विधानसभा और लोकसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता बार-बार यह गुहार लगा रहे हैं कि दोनों भाइयों को अब एक साथ आना चाहिए। हालांकि, शिवसेना और मनसे गठबंधन पर उद्धव ठाकरे ने कुछ नहीं बोला है जबकि राज ठाकरे पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी पार्टी किसी के साथ गठबंधन नहीं करेंगी बल्कि अकेले ही चुनाव लड़ेगी। मुंबई के शिवाजी पार्क के सामने मौजूद मेयर बंगले में बालासाहेब ठाकरे का स्मारक बनाया जाना है।
बालासाहेब ठाकरे के ऐतिहासिक भाषणों की प्रति राज ठाकरे के पिता और बाल ठाकरे के भाई श्रीकांत ठाकरे के पास थी। अब यह सब राज ठाकरे के पास में मौजूद की उम्मीद है। इन चीजों को उद्धव ठाकरे स्मारक में इस्तेमाल करना चाहते हैं। ताकि स्मारक में आने वाले लोगों को बाल ठाकरे के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी मिल सके। इसलिए उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे को फोन करने का मन बना रहे हैं।
मेरा फोन उठाएंगे राज ठाकरे?
राज ठाकरे को उद्धव ठाकरे फोन करेंगे इस बात पर एमएनएस के नेता संदीप देशपांडे ने कहा है कि जो व्यक्ति खुद किसी का फोन नहीं उठाता उनके दिमाग में ही ऐसे सवाल आ सकते हैं। दरअसल उद्धव ठाकरे ने कहा है कि अगर राज मेरा फोन उठाएं तो मैं उन्हें फोन करने के लिए तैयार हूँ। देशपांडे ने कहा कि जहां तक मैं राज साहेब को जानता हूं वह मेरे सामान्य कार्यकर्ता का भी फोन उठाते हैं और हालचाल लेते हैं। जिसको फोन करना होगा वह सीधा फोन कर लेगा, इस तरह से बयानबाजी नहीं करेगा। राज ठाकरे को फोन करने वाली बात उद्धव ठाकरे ने मीडिया से अनौपचारिक बातचीत के दौरान कही है। फिलहाल इस पर राज ठाकरे का अभी तक कोई रिएक्शन नहीं आया है।
राज और उद्धव में कैसे हुई अदावत?
महाराष्ट्र में राज ठाकरे को दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की परछाई कहा जाता था। राज ठाकरे बाल ठाकरे के साथ हर समय, हर जगह, हर रैली और हर सभा में नजर आते थे। राज ठाकरे के चलने फिरने, बातचीत और भाषण में बालासाहेब की झलक नजर आती थी। शिवसेना में सबको लगता था कि बाल ठाकरे के बाद शिवसेना की कमान राज ठाकरे के हाथ में जाएगी। खुद राज भी यही मानते थे। कहा जाता है कि पुत्रमोह के चलते बाल ठाकरे ने उद्धव ठाकरे को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया। यहीं से राज और उद्धव के बीच की नजदीकियां दूरियों में तब्दील हो गईं। इसके बाद राज ठाकरे शिवसेना से अलग हुए और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया।

More Stories
मुंबई से वाराणसी के लिए भी चलाई जाए वंदे भारत ट्रेन: भवानजी
Fulora Foundation Seeks Noida MC Support for an Environmentally friendly Noida City.
भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टीकरण के खिलाफ आवाज उठाने की अपील