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 बांग्लादेश के हिन्दुओं की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाये भारत सरकार : हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति

 

आज मुंबई दादर में हिंदू राष्ट्र समनवय समिति द्वारा बंगला देश में हिंदुओपे चल रहा अमानवीय कृत्य के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए आंदोलन शुरू किया इस इस आंदोलन में स्वतन्त्र सेनानी वीर सावरकर के पोते रणजीत सावरकर और स्वतंत्र सेनानी रवजीभाई छेड़ा के पुत्र भाजपा के वरिष्ठ नेता और मुंबई के पुर्व डेप्युटी मेयर बाबुभाई भवानजी उपस्थित थे
वरिष्ठ भाजपा नेता बाबूभाई भवानजी भारत सरकार से अपील की है कि बांग्लादेश के हिंदुओं की किसी भी कीमत पर रक्षा की जानी चाहिए। हिन्दुओं का एकमात्र सुरक्षित ठिकाना भारत ही है इसलिए बांग्लादेश के दलित बुद्धिस्ट सीख जैन इन तमाम हिंदुओ की रक्षा के लिए भारत सरकार को हर संभव कदम उठाना चाहिए।

सभा को सम्बोधित करते हुए वीर सावरकर स्मारक के अध्य्स श्री रणजीत सावरकरजी ने कहा की “हिंदुओं के खिलाफ किए जा रहे अत्याचार केवल बांग्लादेश का आंतरिक मामला नहीं है। अगर हम अपने पड़ोस में दलित , बुद्धिस्ट, सीख जैन =(हिंदू समाज) अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द खड़े नहीं होते और कार्रवाई नहीं करते, तो भारत महा-भारत नहीं बन सकता। जो इस राष्ट्र का हिस्सा था, वह दुर्भाग्य से पड़ोस बन गया, लेकिन इन लोगों को – जो वास्तव में इस सभ्यता से संबंधित हैं- इन चौंकाने वाले अत्याचारों से बचाना हमारी जिम्मेदारी है।और सरकार से अनुरोध किया कि वह पड़ोसी बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे, जो राजनीतिक उथल-पुथल के बीच है।

बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति के बारे में भवानजी से पूछे जाने पर उन्होंने कहा, की हम (भारतीय) सरकार से वहां हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध कर रहे हैं। हमें पूरा भरोसा है कि सरकार इस दिशा में कदम उठाएगी।पड़ोसी देश में व्यापक अशांति और प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बीच हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, और ऐसी घटनाओं के बारे में खबरें आ रही हैं

पिछले कुछ दिनों में बांग्लादेश में नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिले हैं। शेख हसीना, जिन्होंने 15 साल तक देश पर शासन किया, और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। यह विरोध प्रदर्शन शुरू में नौकरी कोटा योजना के खिलाफ आंदोलन के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद यह एक बड़े आंदोलन में बदल गया और उन्हें सत्ता से हटाने की मांग की गई।