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महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य, 1 मई से 100 दिन की विशेष जांच अभियान शुरू

सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने के निर्णय को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए 1 मई से 15 अगस्त तक विशेष सत्यापन अभियान चलाने का ऐलान किया है। इस अभियान की जिम्मेदारी अतिरिक्त परिवहन आयुक्त रवींद्र गायकवाड की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति को सौंपी गई है। यह जानकारी परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने एक पत्रकार वार्ता में दी।

मंत्री सरनाईक ने बताया कि रिक्षा-टैक्सी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में सभी संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में व्यवसाय करना है तो मराठी भाषा का ज्ञान होना जरूरी है,” और इस बात पर सभी संगठनों की सहमति बनी है।

सरकार ने मराठी सीखने के इच्छुक चालकों के लिए आरटीओ कार्यालयों में विशेष प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए कोकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। साथ ही, मराठी भाषा सीखने के लिए पुस्तिकाएं और ई-पुस्तिकाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

सरनाईक ने बताया कि मराठी सीखने वाले चालकों को राज्य सरकार की ओर से प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जो वाहन परमिट के नवीनीकरण के समय आवश्यक होगा। हालांकि, केवल मराठी भाषा नहीं जानने के आधार पर किसी चालक का लाइसेंस रद्द नहीं किया जाएगा। कार्रवाई केवल अन्य कानूनी उल्लंघनों के आधार पर ही की जाएगी।

राज्य के सभी 59 आरटीओ कार्यालयों को 1 मई से विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले और अवैध परिवहन करने वाले चालकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

परिवहन मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि मराठी सीखने की इच्छा रखने वाले चालकों को पूरा अवसर दिया जाएगा, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

यह 100 दिवसीय अभियान 15 अगस्त तक चलेगा, जिसके बाद 16 अगस्त 2026 को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की नीति तय की जाएगी।

पत्रकार वार्ता में परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।