समाज सेवक किशनदेव गुप्ता ने किया SIT से जांच की मांग
सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
वसई-विरार। वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVCMC) एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता किशनदेव गुप्ता ने मनपा के पूर्व प्र. शहर अभियंता एवं कार्यकारी अभियंता प्रदीप पांचागे के कार्यकाल की SIT (विशेष जांच दल) से जांच कराने की मांग उठाई है। गुप्ता ने नगर विकास सचिव को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि पांचागे के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों, विशेषकर सड़क निर्माण परियोजनाओं में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं।
करोड़ों की सड़क, फिर भी बदहाल हालत
वसई ईस्ट को ‘बेस्ट’ (BEST) सेवा से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद उसकी हालत आज भी जर्जर बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क पर गड्ढों और खराब निर्माण के चलते आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित है।
टेंडर राशि में बड़ा अंतर, उठे सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मनपा द्वारा जारी कार्यादेश में ठेकेदार को 9 करोड़ 22 लाख 86 हजार 332 रुपये का ठेका दिया गया, जबकि मौके पर लगे सूचना फलक पर यह राशि 7 करोड़ 42 लाख 81 हजार 269 रुपये दर्शाई गई है। इस भारी अंतर ने पूरे प्रकरण को संदिग्ध बना दिया है और “सब गोलमाल है” जैसे आरोपों को हवा दी है।
SIT जांच की मांग तेज
किशनदेव गुप्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच SIT के माध्यम से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
जनाक्रोश बढ़ा
स्थानीय नागरिकों में इस मुद्दे को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि बुनियादी सुविधाएं भी सही नहीं मिल रहीं, तो यह सीधे-सीधे जनता के पैसे की बर्बादी है।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में पारदर्शी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

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