महापौर अजीव यशवंत पाटील, उपमहापौर मार्शल लोपीस और नगरसेवक परेश किणी रहे प्रमुख अतिथि
सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
वसई-विरार। नालासोपारा स्थित संघमित्रा गंधकुटी बुद्धविहार ट्रस्ट एवं इंडो-श्रीलंका विरासत कार्यक्रम समिति के संयुक्त तत्वावधान में भिक्खुणी संघमित्रा महाथेरी (सम्राट अशोक की पुत्री) की पावन स्मृति में आयोजित ‘इंडो-श्रीलंका विरासत कार्यक्रम’ एवं धम्म परिषद का आयोजन रविवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्रभर से हजारों बौद्ध उपासक-उपासिकाओं और समाज बंधुओं ने सहभागिता दर्ज कराई।

समारोह की शुरुआत पारंपरिक अंदाज में समुद्र तट से हुई, जहां बौद्ध भिक्षु एवं भिक्षुणी संघ के नेतृत्व में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं के हाथों में पंचशील ध्वज, बौद्ध प्रतीक और भिक्खुणी संघमित्रा की तस्वीरें थीं। इस दौरान श्रीलंका से लाया गया पवित्र बोधिवृक्ष का पौधा, भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा तथा मंगल कलश को सम्मानपूर्वक मुख्य मंच तक लाया गया।

धम्म परिषद के मुख्य मंच पर महापौर अजीव यशवंत पाटील, उपमहापौर मार्शल लोपीस तथा नगरसेवक परेश किणी सहित सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक क्षेत्र की अनेक प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। बौद्ध भिक्षु संघ द्वारा अतिथियों का स्मृति चिन्ह, स्मृति पुस्तिका एवं पवित्र कमल पुष्प भेंट कर सम्मान किया गया।

अपने संबोधन में वक्ताओं ने भारत और श्रीलंका के बीच प्राचीन बौद्ध सांस्कृतिक संबंधों तथा नालासोपारा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक और उनकी पुत्री भिक्खुणी संघमित्रा द्वारा धम्म के प्रचार-प्रसार के लिए किए गए कार्य आज भी विश्व को शांति, करुणा और मानवता का संदेश दे रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान धम्म वंदना, बौद्ध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तथा ऐतिहासिक विरासत पर आधारित विचार गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को भारत-श्रीलंका बौद्ध संबंधों को मजबूत करने वाला और समाज में सद्भावना एवं शांति का संदेश देने वाला ऐतिहासिक कार्यक्रम बताया।

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