October 10, 2026

Sansani ab tak

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अवैध निर्माण पर प्रशासन की चुप्पी, सवालों के घेरे में प्रभाग समिति (जी)

सहायक आयुक्त निलेश म्हात्रे पर गंभीर आरोप

सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
वसई-विरार। वसई-विरार शहर महानगर पालिका (VVCMC) के प्रभाग समिति (जी) क्षेत्र में अवैध निर्माण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। ससुनवघर इलाके में हजारों स्क्वायर फीट में फैले अवैध निर्माण कार्य के तेजी से पूर्ण होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों की चुप्पी ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ससुनवघर में बिना किसी वैध अनुमति के बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किया गया, जो देखते ही देखते पूरा भी हो गया। हैरानी की बात यह है कि पूरे निर्माण के दौरान न तो कोई ठोस कार्रवाई की गई और न ही किसी प्रकार की रोकथाम के प्रयास नजर आए। इस पूरे मामले में सहायक आयुक्त निलेश म्हात्रे की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। आरोप है कि उन्होंने इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि आर्थिक लाभ का भी आरोप प्रभाग अधिकारी पर लग रहा है।

राजीवली क्षेत्र भी बना अवैध निर्माण का गढ़

केवल ससुनवघर ही नहीं, बल्कि प्रभाग समिति (जी) के अंतर्गत आने वाले राजीवली क्षेत्र में भी अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नियमों को ताक पर रखकर लगातार निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई शून्य बनी हुई है।

MRTP कानून के तहत कार्रवाई पर नजर

अब निगाहें नव नियुक्त आयुक्त AIS पृथ्वीराज बी. पी. पर टिकी हैं। शहर में बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर यह देखना अहम होगा कि क्या वे महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम (MRTP Act) के तहत सख्त कार्रवाई के आदेश जारी करते हैं या नहीं। स्थानिकों का मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो न केवल शहर की नियोजन व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि भविष्य में बड़े हादसों की आशंका भी बढ़ सकती है।

नागरिकों में रोष, जवाबदेही की मांग

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि जब आम नागरिकों पर नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता है, तो बड़े स्तर पर हो रहे अवैध निर्माण पर प्रशासन की ढिलाई समझ से परे है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या नव नियुक्त आयुक्त इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाएंगे, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?