Sansani ab tak

Hindi News, हिन्दी समाचार, हिंदी न्यूज़, Latest Hindi News, Breaking News,sansani ab tak

LPG संकट की आंच मंदिरों की रसोई तक, कई जगह प्रसाद और भंडारा प्रभावित

गैस की कमी से देश के कई मंदिरों में अन्नप्रसाद सेवा पर असर, कहीं मात्रा घटी तो कहीं वितरण अस्थायी रूप से बंद

नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में चल रही LPG गैस की कमी अब मंदिरों की रसोई तक पहुंच गई है। इसका असर उन मंदिरों पर साफ दिखाई देने लगा है जहां रोजाना हजारों श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और भंडारा तैयार किया जाता है। गैस की कमी के कारण कई मंदिरों में प्रसाद की मात्रा कम कर दी गई है, जबकि कुछ जगहों पर अन्नप्रसाद सेवा अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ी है। मंदिरों में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं, लेकिन गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से रसोई संचालन मुश्किल हो गया है। कई मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को भोजन के स्थान पर फल प्रसाद देने की व्यवस्था भी शुरू कर दी है। दक्षिण भारत के मंदिरों में भी LPG संकट का असर देखने को मिल रहा है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित प्रसिद्ध बनशंकरी मंदिर में 11 मार्च से मुफ्त भोजन और प्रसाद वितरण अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, अन्नप्रसाद तैयार करने के लिए रोजाना 5 से 6 कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की आवश्यकता होती है। यहां सुबह, दोपहर और शाम तीनों समय भक्तों के लिए भोजन तैयार किया जाता था। लेकिन फिलहाल मंदिर के पास केवल चार सिलेंडर ही उपलब्ध हैं, जिससे पूरे दिन का भोजन बनाना संभव नहीं हो पा रहा है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि जैसे ही गैस की नियमित आपूर्ति बहाल होगी, अन्नप्रसाद सेवा दोबारा शुरू कर दी जाएगी। महाराष्ट्र के प्रमुख धार्मिक स्थल पंढरपुर के श्री विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में फिलहाल गैस की आपूर्ति जारी है, लेकिन प्रशासन ने संभावित संकट को देखते हुए तैयारी शुरू कर दी है। मंदिर समिति और गैस एजेंसियों के बीच बैठक कर भविष्य की योजना बनाई गई है। यदि गैस की कमी बढ़ती है, तो मंदिर में पारंपरिक तरीके से चूल्हे और डीजल जाली पर भोजन पकाने की व्यवस्था की जाएगी। मंदिर प्रशासन का कहना है कि किसी भी स्थिति में श्रद्धालुओं के लिए चलने वाला अन्न भंडार बंद नहीं होने दिया जाएगा। वहीं, शिरडी के साईं बाबा मंदिर में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। मंदिर प्रशासन ने पहले ही संभावित संकट को देखते हुए पर्याप्त गैस का भंडार कर लिया था। साईं प्रसादालय में इस समय करीब 20 टन LPG गैस उपलब्ध है, जिससे लगभग 20 दिनों तक भोजन सेवा सुचारु रूप से जारी रखी जा सकती है। इसके अलावा मंदिर में सौर ऊर्जा परियोजना का भी उपयोग किया जा रहा है, जिसके माध्यम से चावल और दाल पकाई जाती है। इस तकनीक से रोजाना लगभग 200 किलो गैस की बचत हो रही है। मंदिरों में चलने वाले भंडारे और प्रसाद सेवा पर निर्भर रहने वाले कई श्रद्धालुओं पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। हालांकि मंदिर प्रशासन का कहना है कि जैसे ही LPG की आपूर्ति सामान्य होगी, प्रसाद और भोजन सेवा पूरी तरह बहाल कर दी जाएगी। LPG संकट ने पहली बार मंदिरों की रसोई तक असर दिखाया है, जिससे धार्मिक स्थलों पर भोजन व्यवस्था को लेकर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं।