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‘वंदे मातरम् कोस्टल साइक्लोथॉन–2026’ से गूंजा संदेश — सुरक्षित तट, समृद्ध भारत

डहाणू में जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ की मौजूदगी में साइकिल रैली का भव्य स्वागत

सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
पालघर। तटीय सुरक्षा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) द्वारा आयोजित “वंदे मातरम् कोस्टल साइक्लोथॉन–2026” देशव्यापी अभियान का रूप ले चुका है। समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाला यह उपक्रम राष्ट्रीय चेतना और जिम्मेदारी का प्रतीक बनता जा रहा है।

10 फरवरी की सुबह 5 बजे साइकिल रैली दमन से रवाना होकर लगभग 9 से 9:30 बजे के बीच डहाणू पहुंचेगी। यहां जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ और उपविभागीय अधिकारी विशाल खत्री की उपस्थिति में स्कूली विद्यार्थियों और ग्रामीण मछुआरों द्वारा रंगारंग कार्यक्रमों के साथ साइकिल सवारों का भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके बाद सुबह 11 बजे तारापुर स्थित TAPS परिसर में CISF की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगा। रात्रि विश्राम जूचंद्र के चंडिका देवी मंदिर में होगा, जबकि 11 फरवरी को सुबह 5 बजे साइक्लोथॉन मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया के लिए प्रस्थान करेगी।

भारत के विस्तृत समुद्र तट पर 250 से अधिक बंदरगाह हैं, जिनमें करीब 72 EXIM पोर्ट शामिल हैं। ये बंदरगाह देश के लगभग 95 प्रतिशत व्यापार का संचालन करते हैं। तटीय क्षेत्रों में स्थित रिफाइनरी, शिपयार्ड और परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं भारत की आर्थिक प्रगति और ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ हैं, लेकिन तस्करी, घुसपैठ और अन्य अवैध गतिविधियों के खतरे लगातार बने रहते हैं। पिछले पांच दशकों से CISF देश के 12 प्रमुख बंदरगाहों और महत्वपूर्ण तटीय बुनियादी ढांचे की सुरक्षा संभाल रहा है।

पहली कोस्टल साइक्लोथॉन को मिले उत्साहजनक समर्थन के बाद 2026 में इसका दूसरा संस्करण और अधिक व्यापक रूप में आयोजित किया गया है। इस अभियान का शुभारंभ 28 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाकर किया।

यह साइक्लोथॉन 25 दिनों में 6,553 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए भारत की मुख्य भूमि के पूरे समुद्र तट को कवर करेगी, जिससे यह देश का अब तक का सबसे बड़ा तटीय साइकिल अभियान बन गया है। CISF की दो टीमें एक साथ रवाना हुईं—पश्चिमी तट पर गुजरात के लखपत किले से और पूर्वी तट पर पश्चिम बंगाल के बक्खाली से। दोनों टीमें 22 फरवरी 2026 को कोच्चि (केरल) में मिलेंगी।

पश्चिमी मार्ग पर सूरत, मुंबई, गोवा और मंगलूरु, जबकि पूर्वी मार्ग पर हल्दिया, कोणार्क, पारादीप, विशाखापट्टनम, चेन्नई, पुडुचेरी और कन्याकुमारी जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं।

इस अभियान में CISF के 130 अधिकारी भाग ले रहे हैं, जिनमें 65 महिला अधिकारी भी शामिल हैं। सभी प्रतिभागियों ने एक महीने से अधिक समय तक कठोर प्रशिक्षण लिया है, जिसमें सहनशक्ति, पोषण, साइकिल सुरक्षा, लंबी दूरी की साइक्लिंग और प्रभावी पैडलिंग तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया।

साइक्लोथॉन का उद्देश्य तटीय समुदायों में नशीले पदार्थों, हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी के खिलाफ जागरूकता फैलाना, सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय नागरिकों के बीच सहयोग बढ़ाना तथा स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों और सुरक्षा बलों के बलिदान को सम्मान देना है। साथ ही युवाओं में फिटनेस, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यात्रा के दौरान CISF साइकिल सवार 50 से अधिक तटीय गांवों में रात्रि विश्राम करेंगे और आगे भी अपने 47 तटीय यूनिट्स के माध्यम से संवाद जारी रखेंगे। स्वच्छ भारत अभियान, वृक्षारोपण, फिटनेस जागरूकता और मछुआरा समुदाय से सीधे संवाद जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

अभियान के संदेश को व्यापक बनाने के लिए अहमदाबाद, मुंबई, गोवा, बेंगलुरु, कोच्चि, कोलकाता, भुवनेश्वर, विशाखापट्टनम और चेन्नई में एक साथ प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की गई है। अधिक जानकारी और कार्यक्रम के विवरण के लिए CISF ने नागरिकों से अपने आधिकारिक वेबसाइट www.cisf.gov.in पर विजिट करने की अपील की है।

“सुरक्षित तट – समृद्ध भारत” की भावना से प्रेरित यह साइक्लोथॉन न केवल सुरक्षा का संदेश दे रही है, बल्कि राष्ट्रभक्ति, एकता और सामूहिक जिम्मेदारी की नई मिसाल भी पेश कर रही है।