साहित्य, संस्कृति और काव्य का संगम; बड़ी संख्या में पहुंचे साहित्य प्रेमी
सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
वसई-विरार। वसई-विरार शहर महानगरपालिका के ग्रंथालय विभाग, ज्ञानदीप मंडल, उत्तर वसई के संत जोसेफ महाविद्यालय (सतपाला) तथा साहित्य जल्लोष प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 23वां ‘साहित्य जल्लोष’ कार्यक्रम रविवार (12 अप्रैल 2026) को विरार पश्चिम स्थित संत जोसेफ महाविद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरे आयोजन में साहित्य व संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत भव्य ‘साहित्य दिंडी’ से हुई, जिसका उद्घाटन उपमहापौर मार्शल लोपीस ने किया। दिंडी में विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसके बाद वरिष्ठ ग़ज़लकार एडवोकेट डॉ. दिलीप पांढरपट्टे (भा.प्र.से.) के हाथों दीप प्रज्वलन एवं केसर आम के पौधे को जल अर्पित कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया गया।

प्रारंभिक सत्र में भुईगांव की गायिका लैरीसा आल्मेडा ने सुमधुर प्रार्थना गीत प्रस्तुत किया, जबकि शिक्षिका लीनेट परेरा ने स्वागत गीत से अतिथियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का प्रास्ताविक संदेश जाधव ने रखा। इसके पश्चात प्रमुख अतिथियों ने साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए नवोदितों को प्रेरित किया।

महापौर अजीव पाटील ने अपने संबोधन में कहा कि वसई-विरार क्षेत्र की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए महानगरपालिका सदैव प्रतिबद्ध है। वहीं वरिष्ठ अभिनेता अरुण नलावडे ने ‘साहित्य का जल्लोष’ जैसी संकल्पना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में पठन संस्कृति को जीवित रखते हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. दिलीप पांढरपट्टे ने अपने विचारों में कहा कि साहित्य प्रेम और संवेदना का माध्यम है, जिसमें द्वेष के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने स्थानीय बोली के शब्दों को मराठी भाषा में शामिल करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। वरिष्ठ कवि अशोक नायगांवकर ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को ऐसे आयोजनों में जरूर लाएं, ताकि भाषा और साहित्य की परंपरा आगे बढ़े।
कार्यक्रम में मंच पर उपमहापौर मार्शल लोपीस, स्थायी समिति अध्यक्ष प्रवीण शेट्टी, सभागृह नेता प्रफुल्ल साने, वरिष्ठ विधिज्ञ एडवोकेट राजेंद्र पै, संपादक मधुकर भावे, कवि अशोक नायगांवकर, अरुण म्हात्रे सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
दूसरे सत्र में ‘ज्येष्ठ संपादक मुलाखत’ के तहत संपादक मधुकर भावे का साक्षात्कार कुणाल रेगे ने लिया, जिसमें उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। तीसरे सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन में स्थानीय व वरिष्ठ कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतिम सत्र में ‘अत्रे-अत्रे-सर्वत्रे’ नामक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसे दर्शकों का भरपूर प्रतिसाद मिला।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर वसई-विरार शहर महानगरपालिका की तरफ से सभी उपस्थित साहित्य प्रेमियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। यह आयोजन साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणादायी और यादगार साबित हुआ।

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