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प्रभाग समिति ‘एफ’ के सभापति की कुर्सी पर सस्पेंस!

क्या संतूर धर्मेंद्र यादव को मिलेगा मौका?

वसई-विरार। वसई-विरार शहर महानगरपालिका में प्रभाग समितियों के सभापति चयन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कुल 9 प्रभागों में अब तक सभापति का फैसला लंबित है, ऐसे में खासतौर पर प्रभाग समिति ‘एफ’ में सभापति की कुर्सी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) के नगरसेवकों के बीच इस पद को लेकर अंदरूनी हलचल साफ देखी जा रही है। कोई अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में जुटा है, तो कोई संपर्क और समीकरण साधने में लगा हुआ है। वहीं कुछ लोग इस दौड़ में संसाधनों के दम पर भी अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश में हैं।

लेकिन जानकारों की मानें तो BVA प्रमुख हितेंद्र ठाकुर की कार्यशैली अलग मानी जाती है। वे हमेशा “काबिलियत और काम” को प्राथमिकता देते हैं, न कि सिफारिश या दबाव को। यही वजह है कि अंतिम फैसला पूरी तरह योग्यता पर आधारित होने की संभावना है।

संतूर धर्मेंद्र यादव का नाम चर्चा में

प्रभाग ‘एफ’ के लिए जिन नामों की चर्चा जोरों पर है, उनमें नगरसेविका संतूर धर्मेंद्र यादव एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आई हैं। वार्ड प्रभाग 19 (ब) से नगरसेविका बनने के बाद उनके कार्यों को लेकर स्थानीय जनता में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। क्षेत्र में बुनियादी समस्याओं के समाधान से लेकर लोगों से संवाद बनाए रखने तक, उनका कामकाज संतुलित और प्रभावी माना जा रहा है।

सेवा और सादगी की पहचान

संतूर यादव के साथ उनके पति धर्मेंद्र यादव भी लंबे समय से समाजसेवा में सक्रिय हैं। बिना किसी दिखावे के, आम लोगों की समस्याओं को हल करने में उनकी तत्परता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है। उनकी खासियत यह है कि उनका प्रभाव केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारतीय, आदिवासी, मुस्लिम समुदाय यहां तक कि विपक्षी कार्यकर्ताओं में भी उनकी पकड़ और स्वीकार्यता देखी जाती है। जनता के एक फोन कॉल पर तुरंत सक्रिय होना और संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर समस्या का समाधान करवाना उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा है।

अब नजर फैसले पर

प्रभाग समिति ‘एफ’ की सभापति की कुर्सी पर कौन बैठेगा, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। लेकिन इतना तय है कि इस बार मुकाबला केवल राजनीति का नहीं, बल्कि काम, काबिलियत और जनस्वीकृति का भी है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या संतूर धर्मेंद्र यादव को इस जिम्मेदारी का मौका मिलता है या किसी और चेहरे पर नेतृत्व का भरोसा जताया जाता है। फिलहाल… प्रभाग ‘एफ’ की सभापति की कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार है।