हादसा, लापरवाही या फिर सिस्टम की मिलीभगत?
सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
वसई-विरार : वसई-विरार शहर महानगरपालिका क्षेत्र में लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं ने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फैक्ट्रियों, गोदामों और कंपनियों में आग लगने की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं, लेकिन हर बार जांच का निष्कर्ष एक ही—“शॉर्ट सर्किट”! आखिर क्या हर आगजनी के पीछे सिर्फ बिजली ही जिम्मेदार है, या फिर सच पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शहर में बार-बार आग लग रही है, लोगों की जान जा रही है, करोड़ों का नुकसान हो रहा है, तब महानगरपालिका का अग्निशमन विभाग आखिर कर क्या रहा है? क्या फायर ऑडिट सिर्फ कागजों तक सीमित है? क्या बिना सुरक्षा मानकों के कंपनियां नेताओं और अधिकारियों की सरपरस्ती में चल रही हैं?
एक के बाद एक आग… लेकिन कार्रवाई शून्य!
वसई-विरार शहर महानगर पालिका वार्ड प्रभाग क्रमांक 19 में मार्च से अप्रैल 2026 के बीच आगजनी की कई बड़ी घटनाएं सामने आईं। जिसमें 4 मार्च 2026 (चौधरी वजन काटा के पीछे आग), 9 मार्च 2026 (माइकल कंपाउंड के सामने भीषण आग), 10 मार्च 2026 (भंगार गली स्थित प्लास्टिक कंपनी में आग) और 11 अप्रैल 2026 (रिचर्ड कंपाउंड में भयंकर आग, कंपनी जलकर खाक) की तारीख शामिल है। लगातार चार से पांच घटनाएं… भारी नुकसान… लेकिन न कोई बड़ी जांच, न किसी अधिकारी पर कार्रवाई, न अवैध कंपनियों पर शिकंजा?
हर बार “शॉर्ट सर्किट” का बहाना क्यों?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अग्निशमन विभाग मौके पर पहुंचते ही “शॉर्ट सर्किट” की थ्योरी देकर मामले को रफा-दफा कर देता है। सवाल यह है कि क्या हर फैक्ट्री में आग सिर्फ शॉर्ट सर्किट से ही लगती है?, क्या फायर ऑडिट रिपोर्ट की जांच होती है?, क्या बिना एनओसी चल रही कंपनियों की सूची प्रशासन के पास नहीं?, क्या राजनीतिक दबाव में फाइलें दबाई जा रही हैं? अगर कंपनियां नियमों के तहत चल रही थीं, तो आग इतनी तेजी से कैसे फैली? और अगर नियमों का पालन नहीं हो रहा था, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
महापौर और नगर सेवक आखिर मौन क्यों?
वार्ड में चार नगर सेवक मौजूद हैं, शहर में महापौर भी हैं, लेकिन आगजनी की घटनाओं पर किसी जनप्रतिनिधि का सख्त रुख सामने नहीं आया। न घटनास्थल पर गंभीर निरीक्षण, न विभागीय रिपोर्ट सार्वजनिक, न दोषियों के खिलाफ खुली कार्रवाई। क्या जनता की सुरक्षा अब भगवान भरोसे है?, क्या नेताओं की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव तक सीमित है? और क्या अवैध कंपनियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?
अवैध कंपनियों का जाल, सिस्टम की चुप्पी
सूत्रों की मानें तो वसई-विरार क्षेत्र में कई कंपनियां बिना वैध फायर ऑडिट और सुरक्षा मानकों के संचालित हो रही हैं। नियमों के मुताबिक छोटी से बड़ी हर औद्योगिक इकाई के लिए फायर सेफ्टी अनिवार्य है, लेकिन धरातल पर स्थिति भयावह दिखाई दे रही है। अगर समय रहते सख्त जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा हादसा पूरे शहर को झकझोर सकता है। वसई-विरार में उठते ये सवाल अब सिर्फ प्रशासन नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान बन चुके हैं।
अब जनता पूछ रही है…
▪️आगजनी की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कब होगी?
▪️फायर विभाग की जवाबदेही तय क्यों नहीं हो रही?
▪️अवैध कंपनियों पर बुलडोजर कार्रवाई कब?
▪️महापौर और नगर सेवक आखिर चुप क्यों हैं?
▪️क्या मौतों और हादसों के बाद भी सिस्टम नहीं जागेगा?

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