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शादाब की मौत पर पेल्हार पुलिस स्टेशन में बवाल, इंसाफ की आड़ में राजनीति पर उठे सवाल

सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
वसई-विरार: नालासोपारा पूर्व के वाकनपाड़ा इलाके में 5 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ विवाद आखिरकार एक युवक की मौत के साथ बड़े तनाव में बदल गया। इस मामले में घायल सादाब की 1 मई को इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद इलाके में आक्रोश फैल गया। 2 मई की रात परिजन और स्थानीय लोग शव लेकर पेल्हार पुलिस स्टेशन पहुंच गए और न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत एक युवती को कथित तौर पर बार-बार मैसेज भेजे जाने को लेकर हुई थी। युवती के परिवार की ओर से विरोध किए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि दूसरे पक्ष के कुछ युवक हिंदू परिवार के घर पहुंच गए, जहां विवाद बढ़ने पर चाकूबाजी हुई। इस दौरान शादाब सिद्दीकी गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि दूसरे पक्ष की एक महिला भी बुरी तरह जख्मी हुई। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 1 मई 2026 को शादाब सिद्धकी ने दम तोड़ दिया। मौत की खबर सामने आते ही इलाके में तनाव बढ़ गया। मुंबई में पोस्टमार्टम के बाद जब 2 मई की रात शव नालासोपारा लाया गया, तब बड़ी संख्या में लोग पेल्हार पुलिस स्टेशन पहुंच गए। देर रात तक पुलिस स्टेशन परिसर के बाहर भारी भीड़ जमा रही और माहौल बेहद तनावपूर्ण बना रहा।

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। एक तरफ परिवार अपने बेटे को खोने के दर्द से गुजर रहा था, तो दूसरी ओर कुछ लोग इस घटना को राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करते नजर आए। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज रही कि कुछ राजनीतिक चेहरे भीड़ के गुस्से को हवा देकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में जुटे थे।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी युवक की मौत भी राजनीति का माध्यम बननी चाहिए? क्या न्याय की लड़ाई कानून के दायरे में नहीं लड़ी जा सकती? जिस परिवार ने अपना बेटा खोया, उसे सहारे और संवेदना की जरूरत थी या फिर भीड़ और नारों की?

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में पहले ही जानलेवा हमले का केस दर्ज किया गया था, जिसे शादाब की मौत के बाद हत्या की धाराओं में बदल दिया गया। पुलिस ने साफ कहा है कि मामले में किसी भी आरोपी को राहत नहीं दी जाएगी और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई जारी है। काफी मशक्कत और समझाइश के बाद आखिरकार परिजन शव को लेकर कब्रिस्तान के लिए रवाना हुए, जिसके बाद पेल्हार पुलिस स्टेशन और आसपास का माहौल शांत हुआ।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छोटी-छोटी बातों से शुरू होने वाले विवाद आखिर इतनी बड़ी हिंसा में क्यों बदल रहे हैं। साथ ही यह भी कि किसी की मौत पर इंसाफ की मांग जरूरी है, लेकिन उस दर्द को तमाशा और राजनीति का मंच बना देना समाज को किस दिशा में ले जाएगा।