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वाढवण बंदर परियोजना में स्थानीय भूमिपुत्रों और मछुआरों को मिले सर्वोच्च प्राथमिकता — सांसद डॉ. हेमंत सवरा

सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
पालघर: पालघर के सांसद डॉ. हेमंत विष्णु सवरा ने केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से मुलाकात कर महत्वाकांक्षी वाढवण बंदर परियोजना के संदर्भ में स्थानीय मछुआरों और निवासियों के हितों की रक्षा की जोरदार पैरवी की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास की इस बड़ी परियोजना में क्षेत्र के भूमिपुत्रों की आजीविका सुरक्षित रखना और उन्हें प्राथमिकता देना सरकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।

सांसद ने केंद्रीय मंत्री को सौंपे पत्र में स्थानीय मछुआरा समुदाय की आशंकाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि परियोजना से उनके पारंपरिक व्यवसाय और समुद्री पर्यावरण पर प्रभाव पड़ने की चिंता है। इन आशंकाओं को दूर करने के लिए उन्होंने आठ प्रमुख सुझाव प्रस्तुत किए, जिनका उद्देश्य विकास और जनहित के बीच संतुलन स्थापित करना है।

रोजगार में स्थानीयों को प्राथमिकता

डॉ. सवरा ने मांग की कि बंदर परियोजना से जुड़े निर्माण, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और परिवहन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता से रोजगार दिया जाए। केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रहकर उन्हें निकटवर्ती बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में वास्तविक नौकरी के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

मछुआरों को आर्थिक मजबूती

उन्होंने मछुआरों की नावों के आधुनिकीकरण और नेविगेशन उपकरणों के लिए कम ब्याज पर ऋण या सब्सिडी देने का सुझाव दिया। साथ ही कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं और नावों पर सोलर उपकरण लगाने के लिए अनुदान प्रदान कर उनकी आय को स्थिर करने पर जोर दिया।

पर्यावरण संरक्षण और तटीय सुरक्षा

सांसद ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत तटीय क्षेत्रों में वृक्षारोपण तथा बंदरगाह से 25 किलोमीटर के दायरे में भूमि कटाव रोकने के लिए सुरक्षात्मक बांध बनाने की मांग की, ताकि पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जा सके।

पारदर्शिता पर जोर

उन्होंने कहा कि 25 मीटर से अधिक गहराई में होने वाले कार्यों का मछली पकड़ने पर नगण्य प्रभाव पड़ता है—इस संबंध में वैज्ञानिक अध्ययन रिपोर्ट स्थानीय लोगों के साथ पारदर्शी रूप से साझा की जाए। प्रस्तावित शिपिंग कॉरिडोर की स्पष्ट जानकारी देकर यह भी सुनिश्चित किया जाए कि मछुआरों के पारंपरिक क्षेत्रों पर कोई प्रतिकूल असर न हो।

शिक्षा और आधारभूत ढांचे का सुदृढ़ीकरण
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए स्कूलों में विज्ञान, गणित और अंग्रेजी शिक्षा को मजबूत करने, प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण तथा नए मार्ग बनने तक मौजूदा सड़कों को दुरुस्त करने की मांग भी उन्होंने उठाई। साथ ही हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत परियोजनाओं को शीघ्र शुरू करने पर बल दिया।

डॉ. सवरा ने विश्वास जताया कि इन जन-केंद्रित उपायों से जहां राष्ट्रीय विकास को गति मिलेगी, वहीं स्थानीय मछुआरों और नागरिकों का जीवन स्तर भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि इन सुझावों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।