पत्रकार पर फर्जी इनाम घोषित कर एनकाउंटर की तैयारी का मामला
सनसनी अबतक | मनोज तिवारी
लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने हरदोई के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कहा कि “दिमाग खोलकर काम करें, अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें।” अदालत ने यह चेतावनी हरदोई पुलिस की उस कार्यप्रणाली पर दी, जिसे कोर्ट ने कानून के खुले दुरुपयोग के रूप में देखा।
मामला हरदोई के पत्रकार हरिश्याम बाजपेयी से जुड़ा है, जिन्हें वर्ष 2022 में कथित तौर पर एक फर्जी मुकदमे में फंसा दिया गया था। वे वर्ष 2024 से नियमित जमानत पर हैं और हर पेशी पर न्यायालय में उपस्थित भी हो रहे हैं। इसके बावजूद वर्ष 2025 में हरदोई एसपी द्वारा उन्हें “फरार” दिखाते हुए 5 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं, उनके एनकाउंटर की लिखित धमकी देने का भी आरोप सामने आया है।
बताया जा रहा है कि सीओ सिटी अंकित मिश्रा ने भ्रामक और फर्जी आख्या लगाकर न केवल पुलिस अधीक्षक को गुमराह किया, बल्कि राज्य मानवाधिकार आयोग को भी गलत रिपोर्ट भेज दी। हालांकि यह मामला आयोग में अभी विचाराधीन है।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता तैफीक सिद्दीकी ने जोरदार बहस करते हुए तर्क दिया कि हरदोई पुलिस ने न सिर्फ कानून का दुरुपयोग किया है, बल्कि उस आदेश का भी उल्लंघन किया है जिसके आधार पर पत्रकार को जमानत मिली थी।
न्यायमूर्ति बबिता रानी और मो. अब्दुल मोईन की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को सख्त चेतावनी दी कि भविष्य में यदि पत्रकार के साथ कोई भी अप्रिय घटना होती है, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रकरण में पत्रकार के अधिवक्ता ने यूपी के अपर मुख्य सचिव (गृह), डीजीपी, एडीजी लखनऊ जोन, आईजी लखनऊ जोन, जिलाधिकारी हरदोई, एसपी, सीओ, एसएचओ और रेलवेगंज चौकी इंचार्ज को भी पक्षकार बनाया है।
अदालत की इस सख्ती ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं और सत्ता या पद का दुरुपयोग किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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