मुंबई:भाजपा के वरिष्ठ नेता एवंम मुंबई के पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने बताया कि “बालासाहेब ठ।करे के विचारों के विपरीत दिशा में चलने वाली कोंग्रेस के कहेने पे बालासाहेब ठाकरे के विरुद्ध जाकर मराठी मजदूरों, मिल हडताल के बाद दत्ता सावंत के साथ हो गये थे। 1960 -1970 के दसकों में कोटन कपड़े के मिल मराठी मजदूरों हड़ताल किया था। ढाई लाख मजदूरों ने, दो साल छे महीने तक मिले बंघ रही। इन्दिरा गाँधी ने मिलों की जमीन मिल मालिक से लेकर समयानुसार घिरे घिरे बिल्डरों को जमीन बेच दिया। 125 से 150 के करीब मुंबई में मिले थी। दीन रात अलग अलग तिन पाली में चलती थी। सिंथेटिक कपड़े की मिले भिंवडी ,मालेगांव, सूरत अहमदाबाद में जोरों से चलती थी। कोटन/सूती कपड़े की मांग 10 % हो गया। क्योंकि वो मंहगा पडता था। और कोटन कपड़े जलदी फंटजाते थे। और हररोज ईस्त्री करना रख रखाव में भी मंहेगा पडता था। 1960 के दशकों में सिंथेटिक कपड़े की शुरुआत हुई थी। आज कोटन कपड़े अमीरलोग पहेनते है। और गरीब सिथेंटीक कपड़े पहेनते है।उस समय बालासाहेब ठाकरे ने हड़ताल नहीं करने का ऐलान किया था। और ये हड़ताल के पिछे कोग्रेसियो की चाल बताया था। बस फिर क्या❓ इस लंबी हड़ताल ने गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। सबसे ज्यादा मराठी मजदूरों ने आत्महत्या करने का रेकोर्ड भी मुंबई के नाम है। करीब 1500 के आसपास मराठी मजदूरों ने आत्महत्या किया था। आज इन मजदूरों की तिसरी पिढी ये बात भूल कर कोग्रेस और शरद पवार को वोट देती हैं। आज अगर कोटन कपड़े मिल चालू होती? “तो” भारत कोटन कपड़े की निर्यात में प्रथम देश होता। बंगलादेश की जगह पर हम होते। और कोटन उत्पादक शेतकरी /किशानो को उच्च दाम मिलता। और मिल अगर कोकनात और पश्चिमी और उत्तर महाराष्ट्र में सिफ्ट होता? तो मिल मजदूरों को मुंबई में घर मिलता। इसी कांग्रेस के कारणों से आज तक महाराष्ट्र से एक भी प्रघानमंत्री नहीं बना। क्योंकि लोकल पार्टी राष्ट्रीय पार्टी से सोदा बाजी करती हैं। मराठी वोट बैंक अलग अलग लोकल पार्टीओ में बटे हैं। जो हिंदूत्वचा विभाजित करने में कोग्रेस सफल बनी।

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