मुंबई के एक्स डेप्युटी मेयर बाबुभाई भवानजी ने एक प्रसिद्धि पत्र मे बताया है कि आयुर्वेद में पनीर को निकृष्टतम भोजन के रूप में बताया गया है।,
ऐसा कचरा जिसे जानवरों को भी खिलाने से मना किया गया है।
“दूध को फाड़ कर या दूध का रूप विकृत करके पनीर बनता है, जैसे कोई सब्जी सड़ जाए तो क्या उसे खाएंगे ?
पनीर भी सड़ा हुआ दूध है,
भारतीय इतिहास में कहीं भी पनीर का उल्लेख नहीं है और न ही ये भारतीय व्यंजन है।,
क्योंकि *भारत में प्राचीन काल से ही दूध को विकृत करने की मनाही रही है।
आज भी ग्रामीण समाज में घर की महिलाएं अपने हाथ से कभी दूध नहीं फाड़ती!
पनीर खाने के नुकसान,
आयुर्वेद ने तो शुरू से ही मना किया था कि विकृत दूध लिवर और आंतों को नुकसान पहुंचाता है लेकिन अब आधुनिक विज्ञान ने भी अपने नए शोध में साबित किया है कि पनीर खाने से आंतों पर अतिरिक्त दबाव आता है। जिससे पाचन संबंधित रोग होते हैं।
पनीर में पाया जाने वाले प्रोटीन पचाने की क्षमता जानवरों में भी नहीं होती है
फिर मनुष्य उसे कैसे पचा सकता है !
नतीजा होता है खतरनाक कब्ज, फैटी लीवर और आगे चल कर कैंसर जैसी घातक बीमारियों को जन्म देता हैं

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