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वाह रे MBVV पुलिस आयुक्तालय! सवालों के घेरे में तबादला, भ्रष्टाचार पर ‘क्लीन चिट’ की कहानी

सागर इंगोले के खिलाफ ED की कार्रवाई की जगह मिली नई जिम्मेदारी

सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
वसई-विरार। मीरा भाईंदर-वसई विरार पुलिस आयुक्तालय एक बार फिर विवादों में है। जिस अधिकारी के खिलाफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई अपेक्षित थी, उसी को अहम जिम्मेदारी सौंपे जाने से पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मामला पूर्व यातायात पुलिस निरीक्षक सागर इंगोले का है। आरोप है कि एक महिला पुलिस कर्मी ने उनके खिलाफ मुंबई ACB में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, इंगोले महिला कर्मी से हर महीने 15 हजार रुपये की कथित रिश्वत मांग रहे थे, ताकि उसे ड्यूटी में सहूलियत मिल सके।

इस शिकायत के बाद कार्रवाई करते हुए ACB ने इंगोले और एक एएसआई के खिलाफ काशीमीरा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि महज एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी, कार्रवाई खत्म और ‘क्लीन चिट’ भी मिल गई।

अब इसी अधिकारी को पेल्हार पुलिस स्टेशन में पुलिस निरीक्षक के पद पर तैनात कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, यह आदेश पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक द्वारा जारी किया गया।

इस फैसले ने आम जनता के बीच नाराजगी और अविश्वास दोनों को बढ़ा दिया है। लोगों का कहना है कि जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उन्हें जिम्मेदारी देना व्यवस्था पर सीधा सवाल है।

जनता को उम्मीद थी कि पुलिस आयुक्त भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम इसके उलट तस्वीर पेश कर रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या भ्रष्टाचार के आरोपों पर सिर्फ औपचारिक जांच ही होगी या फिर वास्तविक कार्रवाई भी देखने को मिलेगी?

मामले ने अब राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। मांग उठ रही है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लें और आवश्यकता होने पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और कानून पर जनता का भरोसा कायम रह सके।

फिलहाल, सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे इस मामले में वास्तविक जांच होती है या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।