वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सचिन कांबले की सख्ती से 99% गुटखा बिक्री बंद
सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
वसई-विरार। मीरा-भायंदर वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय (एमबीवीवी) के अंतर्गत आने वाले 11 पुलिस स्टेशनों में से पेल्हार पुलिस स्टेशन एक अलग पहचान बनाकर उभरा है। यहां वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सचिन कांबले की सख्त कार्रवाई के चलते गुटखा बिक्री पर लगभग 99 प्रतिशत तक रोक लग चुकी है। इसके विपरीत, अन्य पुलिस स्टेशनों की सीमाओं में गुटखा खुलेआम बिकने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
कठिन हालात में भी सख्त नियंत्रण
रमजान के दौरान अतिरिक्त बंदोबस्त और पुलिस भर्ती प्रक्रिया के कारण स्टाफ की कमी के बावजूद पेल्हार पुलिस ने अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा। सीमित संसाधनों में भी गुटखा माफिया पर कार्रवाई जारी रखी गई, जो विभाग के लिए एक उदाहरण मानी जा रही है।
क्राइम डिटेक्शन शाखा की टीम सक्रिय
पेल्हार पुलिस स्टेशन की क्राइम डिटेक्शन शाखा इन दिनों पूरी तरह एक्शन मोड में है। टीम द्वारा क्षेत्र के पान और किराना दुकानों पर लगातार कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जहां भी गुटखा या प्रतिबंधित सामग्री मिलने की सूचना मिलती है, वहां तुरंत दबिश देकर ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। इस सख्ती से अवैध कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है और कई दुकानदार नियमों का पालन करने को मजबूर हुए हैं।
हफ्ता वसूली के आरोप खारिज
पान व किराना दुकानदारों ने स्पष्ट किया है कि पेल्हार पुलिस द्वारा किसी प्रकार की हफ्ता वसूली नहीं की जाती। हालांकि, बोइसर विधानसभा के शिवसेना (शिंदे गुट) विधायक विलास तरे द्वारा विधानसभा में ऐसे आरोप लगाए गए थे, जिन्हें स्थानीय स्तर पर बेबुनियाद बताया जा रहा है।
बाकी क्षेत्रों में ढिलाई क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पेल्हार पुलिस स्टेशन अपनी सीमा में गुटखा बिक्री को लगभग समाप्त कर सकता है, तो वसई-विरार के अन्य पुलिस स्टेशन ऐसा क्यों नहीं कर पा रहे? क्या यह इच्छाशक्ति की कमी है या फिर कार्रवाई में असमानता?
कमिश्नर से सख्ती की अपेक्षा
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक से अपेक्षा की जा रही है कि वे सभी पुलिस स्टेशनों को एक समान निर्देश जारी करें, ताकि पूरे क्षेत्र में गुटखा बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
पेल्हार पुलिस की कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो अवैध धंधों पर लगाम लगाई जा सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या यह मॉडल पूरे वसई-विरार में लागू होता है या नहीं।

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