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वसई-विरार में ‘ऑपरेशन लोटस’ फेल, बाविआ का परचम

अजीव पाटिल बने महापौर, मार्शल लोपिस उप महापौर; भाजपा को झटका

सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
वसई-विरार। वसई-विरार शहर महानगरपालिका के महापौर और उप महापौर का चुनाव 3 फ़रवरी 2026 को शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। पालघर की जिलाधिकारी इंदु रानी जाखड़ की अध्यक्षता में हुए चुनाव में बहुजन विकास आघाड़ी (बाविआ) ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत के साथ दोनों पद अपने नाम किए। बाविआ के अजीव पाटिल महापौर निर्वाचित हुए, जबकि उप महापौर पद पर मार्शल लोपिस को जिम्मेदारी मिली।

चुनाव प्रक्रिया के दौरान महापौर पद के लिए बाविआ के निषाद चोरघे और प्रफुल्ल साने ने अपने नाम वापस ले लिए। भाजपा की दर्शना त्रिपाठी कोटक ने नामांकन वापस नहीं लिया, जिसके बाद मतदान कराया गया। हाथ उठाकर हुए मतदान में बाविआ के नगरसेवकों ने अजीव पाटिल के पक्ष में समर्थन दिया। इसी तरह उप महापौर पद के लिए कन्हैया बेटा भोईर ने नामांकन वापस लिया, जबकि भाजपा प्रत्याशी मैदान में रहे। मतदान में सर्वसम्मति से मार्शल लोपिस के पक्ष में समर्थन जताया गया।

परिणामों की घोषणा के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष—दोनों खेमों के नगरसेवकों ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई दी। उल्लेखनीय है कि पाँच वर्षों के प्रशासकीय शासन के बाद वसई-विरार महानगरपालिका को फिर से निर्वाचित महापौर और उप महापौर मिले हैं।

महापौर और उप महापौर के चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी द्वारा कथित ‘ऑपरेशन लोटस’ की चर्चाएँ तेज थीं—आशंका जताई जा रही थी कि बाविआ के कुछ नगरसेवक पाला बदल सकते हैं। लेकिन चुनावी नतीजों ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया। ‘ऑपरेशन लोटस’ के विफल रहने के साथ ही बहुजन विकास आघाड़ी ने अपनी राजनीतिक मजबूती का संदेश दिया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी को इस चुनाव में करारा झटका लगा है।

हालाँकि इस चुनाव में भाजपा को महापौर और उप महापौर पद नहीं मिल सके, फिर भी यह पार्टी के लिए आत्ममंथन के साथ-साथ गर्व का विषय भी है। कभी एक सीट पर सिमटी भारतीय जनता पार्टी आज वसई-विरार महानगरपालिका में 44 सीटों तक पहुँच चुकी है। राजनीतिक दृष्टि से यह स्पष्ट संकेत है कि भाजपा महापौर पद से अब केवल चंद कदम दूर है। आने वाले महानगरपालिका चुनाव में भाजपा का महापौर नहीं बनेगा, ऐसा निश्चित रूप से कह पाना कठिन है। बढ़ता जनाधार और संगठनात्मक मजबूती भाजपा को भविष्य की एक मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित कर रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत बाविआ के लिए संजीवनी साबित हो सकती है और आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी मजबूत दावेदारी पेश कर सकती है।