सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
पालघर। एकात्मिक आदिवासी विकास प्रकल्प (ITDP) जव्हार और अंडर द मँगो ट्री (UTMT) सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। इस अवसर पर जव्हार तालुका के 10 से 12 गांवों के करीब 200 आदिवासी किसानों को प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाणपत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम को माननीय प्रकल्प अधिकारी एवं सहायक जिलाधिकारी डॉ. अपूर्वा बासुर के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संचालित किया गया। समारोह में सहायक प्रकल्प अधिकारी दीपक टिके, तालुका कृषि अधिकारी जयराम आढळ, कृषि अधीक्षक मुकणे तथा UTMT के कार्यक्रम प्रमुख सचिन ढवळे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। तालुका कृषि अधिकारी जयराम आढळ ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि मधुमक्खियां कृषि में ‘परागण’ प्रक्रिया के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन न केवल अतिरिक्त आय का स्रोत है, बल्कि फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में वृद्धि करता है। साथ ही उन्होंने किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का भी आश्वासन दिया। सहायक प्रकल्प अधिकारी दीपक टिके ने किसानों के आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि आदिवासी किसान अब तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे समूह बनाकर विभिन्न योजनाओं के लिए आवेदन करें, जिससे उन्हें अधिक लाभ मिल सके। मधुमक्खी पालकों ने अपने अनुभव साझा किए, जिनमें दो महिला किसान भी शामिल थीं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में डर जरूर था, लेकिन प्रशिक्षण के बाद मधुमक्खी पालन से उन्हें अच्छा लाभ मिल रहा है और उनकी खेती में भी सकारात्मक बदलाव आए हैं। उनके अनुभवों ने अन्य किसानों को भी प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद चव्हाण ने किया, जबकि ITDP और UTMT की टीम ने पूरे आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पहल से क्षेत्र के आदिवासी किसानों में आत्मनिर्भरता की दिशा में नई उम्मीद जगी है और ‘मधु क्रांति’ की ओर मजबूत कदम बढ़ते नजर आ रहे हैं।

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