सनसनी अबतक | विशेष प्रतिनिधि
वसई-विरार। मीरा-भाईंदर–वसई विरार पुलिस आयुक्तालय की स्थापना के समय लोगों को उम्मीद थी कि क्षेत्र में अवैध धंधों पर लगाम लगेगी और कानून व्यवस्था और मजबूत होगी। जब आईपीएस सदानंद दाते पहले पुलिस आयुक्त बने, तब उनके कार्यकाल में अपराध और अवैध कारोबारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई देखने को मिली। गुटखा, ड्रग्स, गांजा और अवैध शराब जैसे धंधों पर लगातार छापेमारी की गई और कई बड़े नेटवर्क भी पकड़े गए।
लेकिन समय के साथ हालात बदलते नजर आ रहे हैं। आज मीरा-भाईंदर से लेकर वसई-विरार तक प्रतिबंधित गुटखे का कारोबार खुलेआम चल रहा है जबकि महाराष्ट्र सरकार अब राज्य में प्रतिबंधित गुटखा और सुगंधित तंबाकू की अवैध बिक्री, भंडारण और परिवहन करने वाले माफियाओं के खिलाफ मकोका (MCOCA – Maharashtra Control of Organised Crime Act) के तहत कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। मीरा भाईंदर-वसई विरार में पान की दुकानों, छोटे ठेलों और गुप्त ठिकानों पर गुटखा आसानी से मिल रहा है, मानो इस पर कोई प्रतिबंध ही न हो।
कानून है… लेकिन कार्रवाई कहाँ है?
महाराष्ट्र सरकार ने गुटखा और सुगंधित तंबाकू की बिक्री पर 2012 में प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद राज्य और शहर में खुलेआम इसकी बिक्री होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतना बड़ा गुटखा नेटवर्क आखिर किसकी नजरों से बचकर चल रहा है? गुटखा शहर में आ कहाँ से रहा है? कौन लोग इसकी सप्लाई कर रहे हैं? किन दुकानों और गोदामों से इसका वितरण हो रहा है? इन सवालों का जवाब न तो पुलिस के पास दिखाई देता है और न ही उस विभाग के पास जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर इस पर कार्रवाई करना है।
FDA की रहस्यमयी खामोशी
गुटखा और तंबाकू उत्पादों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की होती है। लेकिन मीरा-भाईंदर और वसई-विरार क्षेत्र में यह विभाग जैसे गायब सा हो गया है। न तो छापेमारी की खबरें सामने आती हैं और न ही बड़े स्तर पर कोई कार्रवाई दिखाई देती है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रशासन इस काले कारोबार से अनजान है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए है?
पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक को एक ईमानदार और सख्त अधिकारी के रूप में जाना जाता है। लेकिन शहर में जिस तरह से प्रतिबंधित गुटखे का कारोबार फैल रहा है, उससे पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस चाहे तो कुछ ही दिनों में इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है, क्योंकि गुटखा बेचने वाली दुकानों और सप्लाई करने वाले लोगों की जानकारी आम लोगों तक को है।
जहर बनता जा रहा है कारोबार
गुटखा सिर्फ एक अवैध कारोबार नहीं, बल्कि समाज के लिए एक धीमा जहर है। युवाओं और मजदूर वर्ग में इसकी लत तेजी से बढ़ रही है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। बावजूद इसके, इसका बाजार लगातार फैलता जा रहा है।
अब कार्रवाई का इंतजार
मीरा-भाईंदर और वसई-विरार के नागरिक अब यह जानना चाहते हैं कि क्या पुलिस और FDA विभाग इस काले कारोबार पर सख्त कार्रवाई करेंगे? क्या गुटखा माफिया के नेटवर्क का पर्दाफाश होगा? या फिर यह जहरीला कारोबार इसी तरह खुलेआम चलता रहेगा और जिम्मेदार विभाग सिर्फ मूकदर्शक बने रहेंगे।

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